मुझे थोड़ा नजदीक से जानने वाले मित्रों को तनिक भी यह भ्रम नहीं होगा कि मैं कोई लिक्खड़ पत्रकार हूं और विचारों के स्तर पर बहुत बुलंद हूं। विचार तो मेरे मन में भी उठते हैं लेकिन वह ज्यादा विस्तार पा सके इससे पहले ही दिमाग के किसी कोने में दबकर रह जाते हैं। वजह...भाई स्वभाव में गंभीरता नहीं है और लेखनी कमजोर है। इसलिए मैं बोलता कम और सुनता ज्यादा हूं। बोलूं तो शब्दों का टोटा हो जाता है... इसलिए चुपचाप सुन लेने में ही भलाई मानता हूं। दो महीने पहले नई नौकरी ज्वाइन की है और अभी काम का ज्यादा दबाव नहीं है या यूं कहे कि काम ही नहीं है। खाली समय में इंटरनेट पर यूं ही कुछ-कुछ खोजता रहता हूं...इसी क्रम में कुछ मित्रों के ब्लॉग से जा टकराया। देखा काफी कुछ लिखा-पढ़ा है हमारे साथियों ने। दो-चार दिन के अंतराल पर किसी नए मित्र के ब्लॉग का लिंक भी मेल पर आ जाता है। जाहिरा तौर पर ये सभी "पत्रकार" ही हैं और शब्दों से खेलने की बाजीगरी हासिल है इन्हें। क्या जबरदस्त लिखते हैं...छोटी-मोटी बातों को भी इतना विस्तार देते हैं और उसका इतने शानदार तरीके से विश्लेषण करते हैं कि कई मर्तबा अपने मूढ़ मगज के दरवाजे हिल गए। हां इनमें से कुछ मित्र ऐसे भी हैं जो कुछ ज्यादा ही लंबी छलांग मारते हैं। इतना कि मुझे लगता है कि अगर संभव होता तो उनके शब्द गोला बनकर लक्षित निशाने को भेद आते। ऐसा तो नहीं हो पाता है, लेकिन हां फिजूल की एक बहस जरूर छिड़ती है ब्लॉग पर और लगे हाथों दो-चार कमेन्ट्स भी आ जाते हैं... भाई इसी बहाने हमारे अजीज दोस्त कुछ लोगों के बीच चर्चा के विषय तो बन ही जाते हैं। काफी दिनों तक मैं उधेड़बुन में रहा कि क्यूं नहीं अपनी छोटी बुद्धि के मुताबिक कुछ राय व्यक्त करने के लिए उस मित्र को एक कमेन्ट भेज दूं... अपनी औकात में रहकर थोड़ा सलाह-सुझाव भी दे दूं। इसी सोच-विचार के तहत ये निष्कर्ष निकाला कि अच्छा हो कि अपना ही कोई ब्लॉग बना लूं। वैसे भी अभी ऑफिस में खाली ही रहता हूं तो इसी बहाने थोड़ा टाइपिंग का अभ्यास भी हो जाएगा। तो इसी ख्याल के तहत ये ब्लॉग आपके सामने है। ब्लॉग का उद्देश्य क्या है ये तो अभी मैं तय नहीं कर पाया हूं, हां इतना जरूर है कि एकाध महीने इस पर लिखूंगा और धड़ाधड़ लिखूंगा... इन लिखित विचारों का स्तर कैसा होगा इसके लिए सबसे पहले लिखी लाइन को ध्यान में रखें तो उचित होगा...हां एक बात तय है कि नाम के अनुरूप इस ब्लॉग में लिखी गई बातें तल्ख जरूर होंगी, लेकिन शालीनता के दायरे में।
ले-आउट ज्यादा आकर्षक नहीं बन पाया है, क्योंकि इसके कई फीचर अभी मेरी समझ में नहीं आ रहे हैं। धीरे-धीरे इसकी साजसज्जा निखरती जाए इसके लिए प्रयास जारी रहेगा।
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Friday, December 7, 2007
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